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Showing posts from October, 2016

न टूटे

ज़माना छोड़ दे तन्हा,नजर सायें भी न आये ।
तुम इतना दुआ करना कि अपना साथ न छूटे ।।

भले मझधार में हो कश्ती तूफा कहर बरपाये।
तुम इतना हौसला रखना मेरा हाथ न छूटे।।

शौक से मुस्कुराना तुम तुम्हारे मुस्कुराने से
मगर ये ख्याल भी रखना किसी का दिल कही न टूटे।।

महफ़िल है तो महफ़िल में बहुत् होंगे शिकायते
किसी के रूठ जाने से  मगर ये महफ़िल न टूटे।

मेरी कविता

ऐ मेरी कविता ! ऐ मेरी कविता  !मैं सोचता हूँ लिख डालूं ,तुम पर भी एक कविता ! 
रच डालूं अपने बिखरे कल्पनाओं  कोरंग डालूंस्वप्निल इन्द्र धनुषी रंगों से,तेरी चुनरी !
बिठाऊँ शब्दों की डोली मेंऔर उतर लाऊँ इस धरा पर !
किन्तु मन डरता है ह्रदय सिहर जाता है ,तुम्हे अपने घर लाते हुए !

की कहीं तुम टूट न जाओ उन सपनों की तरह जो बिखर गए टूट कर !

पलके बिछाएं हूँ अब तक !

उनके चाहत के सपने सजाएँ हूँ अब तक !उनके यादों को सिने में बसाये हूँ अब तक ! 
वो मासूम चेहरा, वो झील सी गहरी आँखें ;वो उनका मुस्काना ,वो उनका शर्माना,भोली सूरत को आँखों में छुपाये हूँ अब तक !
छुप-छुप के हमफिर  हथेली से अपना सहारा छुपाना ;कुछ भी तो नहीं भुला पाए हूँ अब तक !
वो जागी जागी, रातें वो तेरी बातें ;वो जुदाई के दिन , और वो मुलाकातें ;उन्ही यादों में कहाँ  ,  सो पाए हूँ अब तक !
प्यासी-प्यासी सी मेरी भीगी  निगाहें ;ताकती रहती है तेरी वो सुनी राहें ; तेरी राहों में पलके बिछाएं हूँ अब तक !