Saturday, 24 May 2014

मसिहा


जब जब लोगो पर हुए अत्याचार
लोगो ने लगाई गुहार

सर पर कफन बांधे आया मसिहा
और लडता रहा लोगो के लिए
दिन रात ।

सहता रहा आघात पत्थरों के
चुना जाता रहा दिवारों पर

चढता रहा सुलियों पर
छलनी होता रहा गोलियों से
बार बार ।

लोग बने रहे तमाशाबिन
बैठे रहे चुपचाप

 छटपटाते हुए देखते रहे
 मसिहा को
जुल्म बढता रहा
हर रोज।

और जब
 मर गया मसिहा
लोग करने लगे इंतिजार
फिर एक बार

और किसी मसिहे की
 मसिहाआएगा
 ओर हमें बचाएगा
बार- बार,
बार- बार,
बार- बार