सफर में बस चुनौती हो, न कोई भी बहाने हो। गगन के पार जाने तक उड़ाने ही उड़ाने हो। नए पँखो को मेरे बस नया तुम हौसला देना। शजर हो जो छितिज के पार मेरे आशियाने हो।
न जाने कब मौत की पैगाम आ जाये जिन्दगी की आखरी साम आ जाए हमें तलाश है ऐसे मौके की ऐ दोस्त , मेरी जिन्दगी किसी के काम आ जाये.