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एक मुक्तक

सफर में बस चुनौती हो, न कोई भी बहाने हो। गगन के पार जाने तक उड़ाने ही उड़ाने हो। नए पँखो को मेरे बस नया तुम हौसला देना। शजर हो जो छितिज के पार मेरे आशियाने हो।