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जनवरी, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

देशभक्ति की शायरी

कि श्रम के माथ से टपके, जो पानी हो तो ऐसे हो । वतन पर जान दे दे जो, जवानी हो तो ऐसे हो। तिरंगा ओढ़ कर लौटा है जो ये वीर सरहद से हमें भी नाज है उन पर , कहानी हो तो ऐसे हो। वहाँ पत्थर नहीं ऐसा , न उनपर नाज करता है । गिरा कर खून मिटटी पर ,चमन आबाद करता है। नमन करने वो धरती पर , चढ़ा कर शीश आते हैं माँ के उन लाडलो को ये वतन भी याद करता है। 3 बुलंदी और भी  है बात उनकी पर निराली है. सहादत कर जो माटी चूमते है भाग्यशाली हैं, चमन का हर कली हर फूल उनका कर्ज ढोयेगा, लुटाया जान अपना इस वतन पर ये ही माली है  लुटा दी जान भारत पर, मैं उनका मान जगाऊँगा। सदा गुणगान गा कर, सोया स्वाभिमान जगाऊँगा। जगाऊँगा मैं राणा और शिवा के सन्तानो को, नरायण वीर जागेगा, मैं सोनाखान जगाऊँगा। सजाकर आर्थियां जिनकी तिरंगा मान देती है। सहादत देश पर ज़ब हो तो माँ सम्मान देती है. कि उन पर नाज करती है हिमालय की शिलाएं भी, चरण को चूम कर जिसके, जवानी  जान देती है। कोई दौलत पे मरता है, कोई शोहरत पे मरता है।  वतन से प्यार जो करता है, इसी चाहत पे मरता है। रहे खुशहाल मेरा देश औ देशवासी भी, अमर मरकर वो होता है कि जो भ...

एक सच

सुन कर आश्चर्य होगा मुझे ज्यादातर कविताएं तब सूझती है जब मैं टॉयलेट सीट पर बैठा होता हूँ। और वहाँ से उठकर , कागजपर लिखकर मैं  हल्का बहुत हल्का होता हूँ।

इंसानियत कहाँ खो गया ?

उस दिन बड़ा अजीब  हादसा हुआ मेरे साथ। मैंने कुछ पर्ची में विरुद्धर्थी शब्द लिख कर बच्चो में बाट दिया। कहा - अपने अपने उलटे अर्थ वाले शब्द जिनको मिले है खोज लो। कुछ देर तक बच्च...