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लेस दे जे घर अपन वो मोर सँग मा आय।

देख के रद्दा म काँटा मँय मढाथव  पाँव। अउ दही के भोरहा कपसा घलो ला खाँव। झन कहूँ बिजहा मया के बोंय के पछताय। लेस दे जे  घर अपन वो मोर सँग मा आय। फूल पर के भाग काँटा मोर हे तकदीर । मोर मन ला भाय सिरतों ये मया के पीर। रोय भीतर फेर बाहिर हाँस के मुस्काय। लेस दे जे  घर अपन वो मोर सँग मा आय। घाम सह के प्यास रह के जे नही अइलाय। जे भरोसा राम के तुलसी सहीं हरियाय। मोर बिरवा हा मया के रातदिन ममहाय।  लेस दे जे  घर अपन वो मोर सँग मा आय।

लेस दे जे घर अपन वो मोर सँग मा आय।

देख के रद्दा म काँटा मँय मढाथव  पाँव। अउ दही के भोरहा कपसा घलो ला खाँव। झन कहूँ बिजहा मया के बोंय के पछताय। लेस दे जे  घर अपन वो मोर सँग मा आय। फूल पर के भाग काँटा मोर हे तकदीर । मोर मन ला भाय सिरतों ये मया के पीर। रोय भीतर फेर बाहिर हाँस के मुस्काय। लेस दे जे  घर अपन वो मोर सँग मा आय घाम सह के प्यास रह के जे नही अइलाय। जे भरोसा राम के तुलसी सहीं हरियाय। मोर बिरवा हा मया के रातदिन ममहाय।  लेस दे जे  घर अपन वो मोर सँग मा आय।

रूपमाला

तुम किरण थी  मैं अँधेरा, हो सका कब  मेल। खेल कर  हर बार हारा, प्यार का ये खेल।। नैन उलझे  और सपने , बुन सके  हम लोग। आज भी लगता नही ये, था महज संजोग।1। मैं जला जलता  रहा हूँ,  रात भर अनजान। आप रोटी सेंक अपना, चल दिये  श्रीमान।। मैं सहूँगा हर सितम को , मुस्कुराकर यार। आप ने मेरी मुहब्बत, दी बना बाजार।2।