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बड़े हो जाथे

पड़े पड़े सब पड़े हो जाथे  हर छोटू हा बड़े हो जाथे। जेन भरोसा  खुद मा करथे. एक दिन आगू खड़े हो जाथे। दे हुंकारू, सब बढ़िया हे, सवाल पूछना लड़े हो जाथे। हाथ उठा तँय बांध के मुटका, नइ ते मुद्दा सडे हो जाथे। वो डारा ला टूटना परथे  जेन ह ज्यादा कड़े हो जाथे।

गजल : रूठ कर मान जाने से क्या फायदा।

212 212 212 212। ऐसे झूठे बहाने से क्या फायदा। रूठ कर मान जाने से क्या फायदा। प्यार है दिल में तो क्यों न महसूस हो, है नहीं फिर जताने से क्या फायदा। थी जरूरत तभी आप आये नहीं,  आप के रोज आने से क्या फायदा। भूखे थे तब मिला दो निवाला नहीं, मर गयी भूख खाने से क्या फायदा। आ सके ना किसी के किसी काम के, फिर अमीरी दिखाने से क्या फायदा। धर पे है नहीं छाँव माँ बाप को, इतने पैसे कमाने से क्या फायदा।...