कवि मथुरा प्रसाद वर्मा
Monday, 1 March 2021
मुक्तक : मोर अँगरी धर चलव।
एक दिन वो पार जाबो ये भरोसा कर चलव।
पोठ रख विस्वास मन के छोड़ जम्मो डर चलव।
मँय सुरुज के सारथी बन लड़ जहूँ अँधियार ले,
जे विहिनिया चाहथे वो मोर अँगरी धर चलव।
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