कवि मथुरा प्रसाद वर्मा
Sunday, 28 August 2022
मुक्तक
कोई कितना भी पुकारे, पाँव पर हिलता नहीं।
भीड़ है चारो तरफ पर आदमी मिलता नहीं।
आज कल क्या हो गया है, बागबां को दोस्तों,
खार है हर साख पर बस, गुल कोई खिलता नहीं।
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मुक्तक छत्तीसगढ़ी
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