कवि मथुरा प्रसाद वर्मा
Saturday, 20 July 2024
एक मुक्तक
सफर में बस चुनौती हो, न कोई भी बहाने हो।
गगन के पार जाने तक उड़ाने ही उड़ाने हो।
नए पँखो को मेरे बस नया तुम हौसला देना।
शजर हो जो छितिज के पार मेरे आशियाने हो।
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