सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कुण्डल छन्द:मद्यपान


गटक रहा सदा जहर, मरा नही तो क्या।
नष्ट जान माल अगर ,करा नहीं तो क्या।
पड़े पड़े चले गए, नशा करे  तू जा।
बड़े बड़े हुए खतम, अभी  मरे तू जा।

दिवस गुजर रहा नहीं, नींद नहीं रैना।
तन मन धन रुग्ण हुआ, चैन नही नैना।
बहुत पिया अभी जरा ,  चेत जा न प्यारे।
जीवन ना कटे  कहीं, रोग के सहारे।

समय कभी रुका नहीं, झुका ना झुकाए।
दो घूंट बैठा पिये, आँख क्या दिखाए।
उतर गया नशा कहीं, बात बनाएगा।
नजरों  से तेरे  तुझको,  यही गिरायेगा।


कितने घर उजड़ गए, उजाड़े मधुशाला।
आदमी को भी घोल, गटक गया प्याला।
रिश्ते नाते ना रहे, छोड़ गए सारे।
हाल पूछेने यहाँ, आय आज द्वारे।

आज एक बात मान, यार बन्धु भाई।
छोड़ बुरे काम मिले, नरक से रिहाई।
नैन मिला प्यार बढ़ा, गीत मस्त गा ले।
दिल कोई टूट गया, नया दिल बनाले।

कहाँ कहाँ भटक रहे, दिखे अधमरा सा।
जीवन से रोग भगा, चेत जा जरा सा।
हुआ अभी उमर नहीं, बचा ले जवानी।
चुन ले जिंदगी नया, छोड़ कर नदानी।


बन्द करो बन्द करो, बन्द करो पीना।
छोड़ दो अब शराब, चाह रहे जीना।
है उड़ान शेष बहुत, आसमान भी है।
लाय चाँद तोड़ यहाँ, आज आदमी है।


मथुरा प्रसाद वर्मा 
प्रतिभगी क्रमांक 5

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मोर छत्तीसगढ़ी गीत: छत्तीसगढिया शायरी

  छत्तीसगढिया शायरी   1 . बहुत अभिमान मैं करथौ,   छत्तीसगढ के माटी मा । मोर अंतस जुड़ा जाथे,  बटकी भर के बसी मा। ये माटी नो हाय महतारी ये,   एकर मानतुम करव बइला आन के चरत हे,   काबर    हमर  बारी मा  ।   2 मै   तोरे  नाव लेहुँ,  तोरे गीत   गा के मर   जाहूं ।।  जे तै इनकार कर देबे,  त   मै   कुछु खा के मर जाहुं ।। अब तो लगथे ये जी जाही  संगी  तोर    मया मा, कहूँ इकरार कर लेबे    त मै  पगला के मर जाहुं ।।                       3 ये कइसे पथरा दिल ले मै ह  काबर प्यार कर डारेव ।। जे दिल ल टोर के कईथे का अतियाचार कर डारेव ।। नइ  जानिस वो बैरी हा  कभू हिरदे के पीरा ला  जेकर मया मय जिनगी ला  मै  अपन ख़्वार कर डारेव।।               ...

हर जोर जुलम के टक्कर मैं; संघर्ष हमारा नारा है!

अंधियारों ने बहुत सताया नया सबेरा लाना है!!  गावं -गावं और घर-घर जाकर दीप नए जलना है !! जब-जब अत्याचार बढे है ;हमने यही पुकारा है !  हर जोर जुलम के टक्कर मैं; संघर्ष हमारा नारा है!  हम भारत  नन्हे सिपाही ;माँ की लाज बचायेंगे बचायेंगे !  जिस दुश्मन ने आँख उठाई हम उनसे टकरायेंगे !  आन हमें भारत माता का प्राणों से भी  प्यारा है !!  हर जोर जुल्म के  न मंदिर न मस्जिद न गिरिजा  घर गुरुद्वार हो !  ये चाहत है मानवता की ; आपस में भाई चारा हो !  मिटायें आओ हर शोषण  को ; यह संकल्प हमारा है !!  हर जोर जुल्म के  शांति त्याग और खुशहाली का प्रीतिक प्यारा तिरंगा  है ! आन हमारा शान हमारा जान हमारा तिरंगा है ! झुकाना इसका मंजूर नहीं ;मर जाना हमें गवारा है !!  हर जोर जुल्म के 

गजल : रूठ कर मान जाने से क्या फायदा।

212 212 212 212। ऐसे झूठे बहाने से क्या फायदा। रूठ कर मान जाने से क्या फायदा। प्यार है दिल में तो क्यों न महसूस हो, है नहीं फिर जताने से क्या फायदा। थी जरूरत तभी आप आये नहीं,  आप के रोज आने से क्या फायदा। भूखे थे तब मिला दो निवाला नहीं, मर गयी भूख खाने से क्या फायदा। आ सके ना किसी के किसी काम के, फिर अमीरी दिखाने से क्या फायदा। धर पे है नहीं छाँव माँ बाप को, इतने पैसे कमाने से क्या फायदा।...