अपने हालात पे यूँ ही लाचार है ।
हम कभी आम थे अब तो आचार हैं
भूख हमको लगी रोटियाँ मांग ली,
तब से उनके नजर मे गुनहगार हैं ।
जो दवा दे गया दर्दे दिल का हमें ,
सुन रहा इन दिनों वो भी बीमार हैं ।
चोर सब मिल गये पहरेदारों से फिर ,
की सियासत जरा अब वो सरकार है ।
थी दुवा मांग ली चंद खुशियाँ मिले,
हाथ उस दिन से दोनों ही बेकार है ।

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