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संदेश

मुझको उम्मीदों का उजाला देती जा !

मुझको उम्मीदों का उजाला  देती जा । कोई तो निशानी प्यार वाला  देती जा । मै उम्रभर तेरा इंतजार कर सकता  हूँ ; तू लौट आने का हवाला देती जा । किसी मयकस को प्यासा  लौटते नहीं ; आ गया हूँ तेरे दर पे , इक प्याला देती जा । फिर न पिऊंगा किसी मयखाने में कभी तू आज अपनी नैनो की मधुशाला देती जा । वो तेरी हर भूख मिटा देगा देखना ; तू भूखे बच्चे को निवाला देती जा !

जीत की सौगात

अन्नाजी को सलाम ! हर एक हार जीत की शुरुवात होती है ! हार सुबह से पहले एक लम्बी रात  होती है ! जो हार कर भी हि म्मत कभी हराते नहीं ; उन्ही के मुकद्दर में जीत की सौगात होती है !

माँ छोटी सी बन्दुक दे-दे

माँ छोटी सी बन्दुक दे-दे , मैं सेना में जाऊंगा ! डटा रहूगा सरहद पर, भारत की  लाज  बचाउंगा  ! आज देश की माटी का , जन  जन को यही पुकार है  ! जो  देश  के काम न आये ,  उस जीवन को धिक्कार है!! मैं अपने लहू का कतरा-कतरा , देश हित में बहाऊंगा ! कर दूंगा सीना छलनी-छलनी , दुश्मन को धुल चटाउंगा !! रणभूमि में पीठ दिखाऊं, माँ ऐसा तेरा लाल नहीं ! इस देश का सच्चा सैनिक हूँ मैं , कोई भोला बाल नहीं ! लडूंगा आंखरी साँस तक, दुश्मन को मजे चखाऊंगा ! रक्षा करता देश का मैं , सीने में गोली खाऊंगा !! माँ तू आँशु मत बहाना , जब मैं मारा जाऊंगा ! मातृभूमि की रक्षा करने फिर तेरी कोख से आउँगा youtube पर यह कविता सुने

पहली बार !

एक दस्तक सा हुआ मन में , पहली बार! खिला पुष्प , सुने आँगन में / पहली बार / हवाए महक उठी / प्रीत की खुसबू से / प्यारा सा लगा सावन / पहली बार ! यौवन ने ली अंगड़ाई / हलचल सी मच गई / हृदय में कोई मार गया कंकड़ / ठहरे हुए पानी में / पहली बार ! एक धुंधली  सी तस्वीर / उभरने लगी बार बार / स्मृति पटल पर / बहुत कुछ खो कर हुआ / कुछ पा लेने का एहसास / पहली  बार !

इसी के कमाई से तो ये सरकार चल रही है !

नशा, नश-नश में समाई आज के समाज के !  नशे  के गुलाम हो रहे सारे नवजवान आज  के ! पीढ़ी - दर-पीढ़ी इसका प्रचार चल रही  है !  इसी के कमाई से तो ये सरकार चल रही  है !

हर जोर जुलम के टक्कर मैं; संघर्ष हमारा नारा है!

अंधियारों ने बहुत सताया नया सबेरा लाना है!!  गावं -गावं और घर-घर जाकर दीप नए जलना है !! जब-जब अत्याचार बढे है ;हमने यही पुकारा है !  हर जोर जुलम के टक्कर मैं; संघर्ष हमारा नारा है!  हम भारत  नन्हे सिपाही ;माँ की लाज बचायेंगे बचायेंगे !  जिस दुश्मन ने आँख उठाई हम उनसे टकरायेंगे !  आन हमें भारत माता का प्राणों से भी  प्यारा है !!  हर जोर जुल्म के  न मंदिर न मस्जिद न गिरिजा  घर गुरुद्वार हो !  ये चाहत है मानवता की ; आपस में भाई चारा हो !  मिटायें आओ हर शोषण  को ; यह संकल्प हमारा है !!  हर जोर जुल्म के  शांति त्याग और खुशहाली का प्रीतिक प्यारा तिरंगा  है ! आन हमारा शान हमारा जान हमारा तिरंगा है ! झुकाना इसका मंजूर नहीं ;मर जाना हमें गवारा है !!  हर जोर जुल्म के