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संदेश

मुक्तक

नजर में हो कोई परदा, नजारा हो तो कैसे हो ।। कोई जब डूबना चाहे , किनारा हो तो कैसे हो।। किसी के हो न पाये तुम, यहां पल भी मुहब्बत में,  बताओ तुम यहाँ कोई, तुम्हारा हो तो कैसे हो।

प्रथम स्टेट जम्बूरी डिमरापाल,जगदलपुर की यादें।

यादें

घोटाले देंगे

सपने बड़े निराले देंगे।। हर रोज नए घोटाले देंगे।। राजनेता हम इस देश को। बीवी ,बच्चे और साले देंगे।। चाबी दे दे कर चोरों को फोकट में सबको ताले देंगे।। घासलेट महंगी हुई तो क्य...

जीवन के सपने

मैंने चाहा था कभी जीवन के बेरंग कैनवास पर हसिन सपनो से रंग देना। मैं उम्रभर भागता रहा उन्ही सपनो के पीछे। तलाशता रहा दुनियाँ भर के रंग ताकि जीवन हो सके रंगीन सपनों की तरह। ...

जीवन

जीवन जीवन क्या सिर्फ इसलिए है कि चाहे जैसे भी हो जिया जाये । इस हलाहल को पीना ही है तो क्यों न मुस्कुरा कर पिया जाये। कोई लक्षय नही पथ ही पथ है और उनपर चलना सिर्फ चलना है। सुवि...

प्यास

वो चींखने चिल्लाने वाले कौन है ? कौन है? कौन है ? जो भूखे है ? जो प्यासे है ? बेघर है? नंगे है ? क्या उनके दंगे है ? अरे नहीं ! उन्हें भला कहा फुर्सत है ? वो क्यों  चीखेंगे ? क्यों चिल्लायेंगे? वो सब तो मौन है। फिर भला ये कौन है? ये वो है जो ख़ास मौको पर आते है हमारी भूख और प्यास रोटी और गरीबी को जो लोग भुनाते है। ये वही लोग है जो चिल्लाते है जो हमारी प्यास से अपनी प्यास बुझाते है।

रोटी और भूख

रोटियां तब भी बिकती थी। रोटियां अब भी बिकती है। रोटियां वो भी बेचते थे रोटियां ये भी बेचते है। फर्क है बस इतना कि तब हम रोटियां खरीद नहीं पाते थे।। अब रोटियां खा नहीं पाते। क्यू कि भूख तब भी नहीीं बिकता था भूख अब भी नही बिकता है।